Story on illegal bribes taken by police through children from coal pullers

Illegal bribes

देश की कोयला राजधानी धनबाद। अवैध कोयले से यहां की पुलिस लंबे समय से बेहिसाब काली कमाई बटोर रही है। पैसे कमाने के चक्कर में पुलिस अब नाबालिग का सहारा ले रही है। डीबी स्टार की टीम ने पुलिस की एक शर्मनाक करतूत को कैमरे में कैद किया है।

” अबे…..40 दे, नहीं तो भितरे भेज देंगे। …देता है कि बहस करेगा…।” ऐसे ही कुछ अपशब्दों की बौछार के साथ शहर में पुलिस अवैध वसूली के लिए हमेशा चौकन्नी रहती है। आम लोगों की सुरक्षा के प्रति धनबाद की पुलिस इतनी मुस्तैद कभी नहीं रहती जितनी वसूली के लिए रहती है। कोयले से जुड़े कारोबारी जानकारों के अनुसार, आलाधिकारियों से पुलिस को वसूली का टारगेट मिलता है। इसे हर हाल में पूरा करना पड़ता है। ऊपर तक हिस्सा पहुंचता है। टारगेट से चूके तो गई मलाईदार पोस्टिंग। वसूली का यह अत्यंत आवश्यक काम पुलिस अहले सुबह तीन बजे से शुरू कर देती है। वसूली दिनभर चलती है। शहर की सुरक्षा में लिए बना मटकुरिया चेक पोस्ट समेत चार थाना क्षेत्रों के मेन रोड में पुलिस और इसके एजेंट व दलाल कैसे वसूली करते हैं, यह डीबी स्टार की टीम ने देखा।

डीआईजी से लेकर एसपी तक कुछ नहीं कर पा रहे

धनबाद की सुरक्षा और पुलिस के आचरण पर यहां के डीआईजी शंभू ठाकुर ( प्रमोटी आईपीएस) और एसपी राकेश बंसल (2007 बैच के आईपीएस) कुछ सुनना नहीं चाहते हैं। इन दोनों अधिकारियों का रुख हमेशा पुलिस को बचाने का रहता है। सवाल उठना लाजिमी है, आखिर क्यों?

इसकी बहुत सी वजहें हो सकती हैं। गलत धंधों को संरक्षण देने वाली पुलिस के दोनों बड़े पदाधिकारी हैं। ऐसे में क्या यह मान लिया जाए कि इनकी जानकारी के बगैर पुलिस की अवैध वसूली चल रही है? अगर ऐसा है तो यह और भी चिंतनीय है। लेकिन यह पचने लायक बात भी नहीं कि सेनापति को ही यह पता न हो कि उनकी सेना कहां युद्ध लड़ रही है।

कैमरा देख पुलिस जवानों ने कहे अपशब्द

धनबाद के केंदुआडीह, मटकुरिया, बैंक मोड़, श्रमिक चौक पर डीबी स्टार की टीम ने पुलिस की अन्य तरह की वसूली को छोड़ सिर्फ सड़क से कोयला लदी साइकिलों से होने वाली वसूली का जायजा लिया तो पता चला कि सिर्फ चार किलोमीटर के क्षेत्र में कितने बड़े पैमाने पर अवैध वसूली हो रही है। लोगों से मिली जानकारी के आधार पर डीबी स्टार की टीम ने अहले सुबह सड़क पर होने वाले अवैध वसूली के कुछ दृश्यों को जब कैमरे में कैद किया तो एक-दो स्थान पर यह पुलिस जवानों को नागवार लगा। अपशब्द और गंदी भाषा का इस्तेमाल करने से वे बाज नहीं अाए। ऐसा दर्शाया मानों शहर की सड़कों पर मालिकाना हक का उन्हें पट्टा मिला है। कुछ भी करना है तो उनकी इजाजत से, अन्यथा बर्बाद कर देंगे। ऐसी ही बातें कही गई। शायद उन्हें यह नहीं बताया गया कि उनकी पोस्टिंग जनता की सुरक्षा और भलाई करने के लिए हुई है, कि अवैध वसूली और रंगदारी के लिए।

अफसरों का खौफ, ही मर्यादा की चिंता

गोधर पुल से श्रमिक चौक तक के तीन-चार किलोमीटर के दायरे में पुलिस की खुलेआम वसूली होती है। ना ही उन्हें बड़े अफसरों का खौफ है और ही पुलिस की मर्यादा की चिंता। अंधेर नगरी। कदम-कदम पर मनमानी और कानून का खुले तौर पर उल्लंघन। धनबाद पुलिस के चंद जवानों की कार्यशैली देख समझ पाना मुश्किल हो गया कि साइकिल पर कोयला ले जाने वाले चोर हैं या उनसे अवैध वसूली करने वाले… आखिर इसे देखनेवाले जिम्मेवारों को यह गुंडागर्दी क्यूं नहीं नजर आती… हमाम में सभी नंगे तो नहीं।

Is this reality of our india…where the persons who are pulling 40-50kg of coal daily and earning their livelihood by what we say “Khoon Pasina Ek Karke” are also being bribed??